
खेत वही हैं… लेकिन खेती बदल गई है। जिस जमीन से कभी एक फसल निकलती थी, वहां अब तीन-तीन फसलें उग रही हैं। और लखनऊ के मंच से जो दावा हुआ—वो सीधे किसानों की जेब से जुड़ा है।
लखनऊ से संदेश—UP अब एग्रीकल्चर पावर
योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में साफ कहा कि उत्तर प्रदेश अब कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने “लैब टू लैंड” मॉडल को इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक, केंद्र और राज्य सरकारों के तालमेल और सही रणनीति ने खेती को नई दिशा दी है। खेती अब किस्मत का खेल नहीं… टेक्नोलॉजी का रिजल्ट बन चुकी है।
थ्योरी से खेत तक—लैब टू लैंड की असली ताकत
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले रिसर्च लैब तक सीमित रहती थी और खेत तक पहुंचने में सालों लग जाते थे। लेकिन अब “लैब टू लैंड” मॉडल ने इस दूरी को खत्म कर दिया है। नई तकनीक, बेहतर बीज और वैज्ञानिक सलाह सीधे किसानों तक पहुंच रही है, जिससे उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़े हैं।
एग्रो-क्लाइमेटिक जोन—हर इलाके की अलग रणनीति
सीएम योगी ने कहा कि अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुसार नीतियां बनाना जरूरी है। हर क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और जरूरत अलग होती है—इसलिए एक ही नीति पूरे राज्य पर लागू नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सम्मेलनों के जरिए स्थानीय स्तर पर समाधान खोजे जा रहे हैं, जिससे किसानों को सीधे फायदा मिल रहा है।
एक जैसी नीति से खेती नहीं चलती… जमीन की भाषा समझनी पड़ती है।
KVC से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक—सिस्टम हुआ एक्टिव
2017 में जहां सिर्फ 69 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) निष्क्रिय स्थिति में थे, आज वे पूरी तरह सक्रिय होकर किसानों तक नई तकनीक पहुंचा रहे हैं। हर एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं, जो खेती में इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
8% से 18%—कृषि विकास में रिकॉर्ड छलांग
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8% से बढ़कर लगभग 18% तक पहुंच गई है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं… बल्कि उस बदलाव का संकेत है, जो जमीन पर दिख रहा है— बेहतर उत्पादन, ज्यादा मुनाफा और बढ़ता आत्मविश्वास।
खेती + मैन्युफैक्चरिंग = तेज विकास
सीएम योगी ने कहा कि अगर कृषि और मैन्युफैक्चरिंग के बीच बेहतर तालमेल हो, तो विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है। उन्होंने जोर दिया कि अब समय है खेती को वैल्यू एडिशन से जोड़ने का—ताकि किसान सिर्फ उत्पादन ही नहीं, प्रोसेसिंग से भी कमाई कर सकें।
तकनीक से बढ़ी पैदावार—100 कुंतल तक पहुंचा धान
नई तकनीकों और बेहतर बीजों के इस्तेमाल से कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन 50-60 कुंतल से बढ़कर 100 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है। International Rice Research Institute जैसे संस्थानों की मदद से नई किस्में और तकनीक विकसित की जा रही हैं।
प्रेरणा बना किसान—रामशरण वर्मा का मॉडल
बाराबंकी के प्रगतिशील किसान रामशरण वर्मा का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कम पढ़ाई के बावजूद उन्होंने वैज्ञानिक खेती से शानदार परिणाम हासिल किए हैं। उनका मॉडल दिखाता है कि सही जानकारी और तकनीक से कोई भी किसान सफल हो सकता है।
तीन फसलें, ₹1 लाख मुनाफा—जमीन बदल रही तस्वीर
कानपुर देहात, औरैया, इटावा, मैनपुरी, हरदोई और एटा जैसे जिलों में अब किसान साल में तीन-तीन फसलें ले रहे हैं। कुछ मामलों में मक्का जैसी फसल से प्रति एकड़ ₹1 लाख तक का मुनाफा हो रहा है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों में नहीं…ग्राउंड रियलिटी में दिख रहा है।
उत्पादन में रिकॉर्ड—UP बना लीडर
आज उत्तर प्रदेश में:
- 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं
- 211 लाख मीट्रिक टन चावल
- 245 लाख मीट्रिक टन आलू
- 48 लाख मीट्रिक टन तिलहन
का उत्पादन हो रहा है। यह आंकड़े बताते हैं कि UP अब देश की कृषि अर्थव्यवस्था में लीडिंग रोल निभा रहा है।
फूड प्रोसेसिंग और इंटरनेशनल सेंटर—नई उम्मीद
आगरा में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर की स्थापना से फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। खेती तब तक अधूरी है…जब तक उसका सही दाम न मिले।
लखनऊ का यह कृषि सम्मेलन सिर्फ एक आयोजन नहीं… बल्कि उस बदलाव की तस्वीर है, जो उत्तर प्रदेश के खेतों में दिख रहा है। खेती अब परंपरा नहीं… एक प्रोफेशन बन चुकी है। अब सवाल यह है क्या यह मॉडल पूरे देश में लागू हो पाएगा? अगर किसान मजबूत हुआ…
तो देश की अर्थव्यवस्था खुद मजबूत हो जाएगी।
Salary बढ़ेगी या रह जाएगी सपना? ये काम नहीं किया तो पछताओगे!
